Latest Entries »

मीन, जंगल और जल का संरक्षण करना बेहद जरूरी…
====================================images

पर्यावरण के बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती, लेकिन औद्योगिकीकरण की अंधी दौड़ में अग्रसर लोगों को प्राकृतिक संरचना की जरा भी चिंता नहीं है। कृषि प्रधान जिले में मुट्ठी भर वन संपदा का संरक्षण नहीं हो पा रहा है और वहीं दूसरी ओर थोक में उद्योग लग रहे है। वर्तमान परिस्थति को देखते हुए ऐसा लगता है कि शासन-प्रशासन के साथ-साथ आम जन ने भी पर्यावरण को प्रकृत्ति से दूर करने की मानसिकता बना रखी है। जिले का भगौलिक क्षेत्रफल 4 लाख 46 हजार 674 वर्ग किलोमीटर है और यहां की आबादी 16 लाख से भी अधिक है। जबकि दूसरी ओर वन क्षेत्र बमुश्किल 5 प्रतिशत है। ऐसे में बढ़ती आबादी और औद्योगिकीकरण से पर्यावरण प्रदूषण के खतरे से पूरा जिला घिर गया है। जिले में लगने वाले पावर प्लांट तथा विद्युत वितरण के लिए लगने वाले टावर लाइनों के कारण हरियाली की बलि ली जा रही है। एक तो वैसे ही कम वन क्षेत्र के चलते पहले से जिले को गर्म क्षेत्र के रुप में जाना जाता है और ऊपर से पावर प्लांट की भेंट हजारों वृक्ष चढ़ चुके हैं, वहीं अभी हजारों वृक्षों की बलि लेनी बाकी है। हरियाली कटने से पर्यावरण असंतुलित होगा, जिससे जिले में बारिश पर विपरीत असर पड़ेगा, जिससे अभी से पानी की कमी से जूझ रहे जिले को पानी की बड़ी किल्लतों का सामना करना पड़ेगा। पीएचई विभाग के अधिकारी पिछले पांच वर्षों में भू-जल स्तर के 50 फीट तक नीचे चले जाने की बात स्वीकार कर रहे हैं। पर्यावरण संतुलन बनाने केन्द्रीय शासन ने उद्योगों के लिए ग्रीन बेल्ट विकसित करने कानून बनाया है। इस कानून के तहत संबंधित उद्योग को अनुपातिक तौर पर निर्धारित जमीन में ग्रीन बेल्ट विकसित करना है। जिले में 5-6 पावर प्लांट निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच चुके है। बन रहे पावर प्लांटों को अपने निर्माण कार्य के साथ ही ग्रीन बेल्ट का विकास करना था, लेकिन निर्माण कार्य के अंतिम चरण में पहुंच चुके प्लांटों के ईद-गिर्द कहीं ग्रीन बेल्ट नजर नहीं आ रहा है।
आंकड़ों को देखा जाए तो जिले की आबादी के हिसाब से यह ऊंट के मुंह में जीरा के सामान है, लेकिन लोगों को जागरुक करते हुए लोगों को पर्यावरण प्रदूषण करने से रोका जा सकता है। भू-जल स्तर बनाए रखने के लिए शासन की रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने की योजना नगर पालिका में सिर्फ शुल्क जमा कराने तक सिमट गई है। योजना लागू हुए आठ साल बीत चुके है। इस दौरान हजारों मकान बने पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाए गए। तेजी से गिरते भू-जल स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए नगरीय प्रशासन विभाग ने अगस्त 2006 में सभी नगरीय निकायों को आदेश दिए थे कि 140 वर्गमीटर से अधिक कवर्ड एरिया पर नए निर्माण कार्य की अनुमति देने के साथ रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की फीस भी जमा कराई जाए। भवन निर्माण के बाद वहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाए। एक व्यवस्था यह भी है यदि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भवन स्वामी स्वयं वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवा लें और इसका प्रमाण प्रस्तुत करें तो जमा कराई गई राशि वापस कर दी जाए। शासन का मानना था कि इससे लोग वाटर हार्वेस्टिंग लगाने के लिए प्रेरित होंगे और भू-जल स्तर बढ़ सकेगा, लेकिन इसके लिए लोग गंभीर दिखाई नहीं दे रहे है। इसका कारण नगर पालिका की उदासीनता को भी माना जा सकता है। नए मकान निर्माण की अनुमति देते समय नगर पालिका वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए शुल्क जमा करा लेता है, लेकिन बाद में मकानों में सिस्टम लगाया गया है या नहीं इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। एक ओर पानी की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे है। पानी बचाने के लिए नगर पालिका गंभीर नहीं है। हर साल गर्मी में भू-जल स्तर नीचे जाने से सैकड़ों नलकूप व हैंडपंप काम करना बंद कर देते हैं। जिले में वन विभाग, मनरेगा के तहत जिला पंचायत तथा क्रेडा द्वारा पौधरोपण के नाम पर हर साल लाखों की तादाद में पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन इन पौधों का कहीं कोई अता पता नहीं है। गत वर्ष तीनों विभागों के संयुक्त प्रयास से 16 लाख पौधे रोपे गए हैं। इसी तरह पिछले के वर्षों में भी लाखों की तादाद में पौधरोपण किया गया है। अगर पिछले 5 वर्षों में किए गए पौधरोपण के लिए लगने वाली जमीन की गणना की जाए तो वह जिले के क्षेत्रफल से भी ज्यादा होगी। ऐसे उद्देश्यहीन प्रयास ना केवल लोगों के बीच मजाक बनकर रह गया है, बल्कि शासन का करोड़ों नुकसान अलग है। पिछले 5 वर्षों में लगाए गए पौधों में से 5 प्रतिशत पौधों को जिंदा रखा जा सका होता तो आज जिले के चारों ओर हरियाली का राज होता।

सौजन्य साभार- इंटरनेट कि दुनियाँ श्री गूगल महाराज एवं संकलन नीलकमल वैष्णव अनिश

Advertisements

Apne rang mein rang do unko,

chehra jinka bhata tumko,


Gulal to 1 bahana hai,

yaaron karib unke jana hai,


Hum to kab k rang chuke,

jabse unke nayan jhuke,


rang, gulal aur prit ki holi,

khushi, mauj aur ikrar ki holi,


aaj saji sab taraf rangoli hai,

rango mein simti pyaari holi hai,


khushiyon mein dubi toli hai,

yaaron bura na mano holi hai.


!!! H O L I   M U B A R A K !!!

– – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – (Copy)

 
अपने रंग में रंग दो उनको
चेहरा जिनका भाता तुमको
 
गुलाल तो एक बहाना है
यारों करीब उनके जाना है

हम तो कब के रंग चुके
जबसे उनके नयन झुके
 
रंग गुलाल और प्रीत की होली
ख़ुशी, मौज और इकरार की होली
 
आज सजी सब तरफ रंगोली है
रंगों में सिमटी प्यारी होली है
 
खुशियों में डूबी टोली है
यारों “बुरा ना मानो होली है”
 
!!! होली मुबारक !!!
 
®नीलकमल वैष्णव”अनिश”
आप सभी को रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं…17801_145448938962262_850513272_n

 

Holi Hai…

Dil ne ek baar aur humaara kehna maana hai,
Is holi men phir use rangne jaana hai.

Har saal khareedten hain rang, karte hai taiyaari,
Is baar to khelenaa saath, dekhnaa raah humaari.

Shahar mein sabse pooch rahe hain , rang-e-mohabbat kahaan milega
Raat ko khuda ne bataaya ki abhi aur imtehaanon se guzarnaa parega

Neela, hara , peela , gulaabi yeh sab to ek bahaana hai,
Holi ka ho din ya kuch aur hume to tumse milne aana hai

Dil ne ek baar aur humaara kehna maana hai,
Is Holi men phir use rangne jaana hai…
– – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – (Copy)
होली है…

दिल ने एक बार और हमारा कहना माना है 
इस होली में फिर उसे रंगने जाना है 

हर साल खरीदतें हैं हम रंग करते हैं तैयारी 
इस बार तो खेलना साथ देखना राह हमारी 

शहर में सबसे हम पूंछ रहे हैं रंग-ए-मोहब्बत कहाँ मिलेगा 
रात खुदा ने बताया की अभी और इम्तिहानों से गुजरना पड़ेगा 

नीला, हरा, पीला, गुलाबी रंग यह सब तो एक बहाना है 
होली का हो दिन या कुछ और हमें तुमसे मिलने आना है 

दिल ने एक बार और हमारा कहना माना है,
इस होली में फिर उसे रंगने जाना है…

®नीलकमल वैष्णव”अनिश”
आप सभी को रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं…

Holi
Holi aati yaad dilati
Pichli kitni Holi

Vo bachpen vali Holi
Vo gubbaro ki Holi

Vo sakhiyo wali Holi
Vo gujiyo wali Holi

Vo thumko wali holi
Holi aati yaad….

Har Holi albeli hoti
Holi aati hume batati
jane kitne raj dikhati
Holi aati rang lagati

Holi aati gale lagati
Aakar sab ko nahelaati

Tun mun ka vo mail hatati
Holi aati yaad dilati
Pichli kitni Holi

Holi aati yaad dilati
Rango se tann mann sahlati
Bheege bheege geet sunati
Pichkaari se rang barsaati

Holi aati yaad dilati
Bhabhi, saali se rang dalwaati..

Holi aati yaad dilati
Pichli kitni Holi
————————(Copy)
होली

होली आती याद दिलाती
पिछली कितनी होली

वो बचपन वाली होली
वो गुब्बारों वाली होली

वो सखियों वाली होली
वो गुझियों वाली होली

वो ठुमको वाली होली
होली आती याद दिलाती
पिछली कितनी होली

हर होली अलबेली होती
होली आती हमें बताती
जाने कितने राज दिखाती
होली आती रंग लगाती

होली आती गले लगाती
आकर सबको नहलाती

तन मन की वो मैल हटाती
होली आती याद दिलाती
पिछली कितनी होली

होली आती याद दिलाती
रंगों से तन-मन सहलाती
भीगे-भीगे गीत सुनाती
पिचकारी से रंग बरसाती

भाभी,साली से रंग डलवाती
होली आती याद दिलाती
पिछली कितनी होली
®नीलकमल वैष्णव”अनिश”
आप सभी को रंगोत्सव की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं…

neel5

मेरी ज़िन्दगी एक बंद किताब है…

जिसे आज तक किसी ने खोला नहीं…

जिसने खोला उसने कभी पढ़ा नहीं…

जिसने पढ़ा उसने मुझे समझा नहीं…

और जो समझ सके वो मिला ही नहीं…

▄█▀▀║░▄█▀▄║▄█▀▄║██▀▄║
██║▀█║██║█║██║█║██║█║
▀███▀║▀██▀║▀██▀║███▀
░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░
☆██▀║██║█║██▀║██▄║█║██║██▄║█║▄█▀▀║☆
☆█▐▀║█▐║█║█▐▀║█▐║▀█║█▐║█▐║▀█║█▐║▀█║☆
☆███║▀██▀║███║██║░█║██║██║░█║▀███▀║☆
░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░♥░

हो गई शाम किसी के इंतज़ार में

बीत गई रात किसी के इंतज़ार में

फिर हुआ सवेरा किसी के इन्तजार में

हम इंतज़ार करना सिख गये किसी के इन्तजार में

मेरे सजदों कि इबादत को तू क्या जाने ???

हाथ जो उठाया तेरी खुशियाँ मांगी…

सर जो झुकाया तेरी जिंदगी मांगी…
———————–(अनजान)

शुभ रात्रि स्नेही मित्रों

n copy

images

हमारे मोहल्ले में, एक बहुरुपिया आया
तरह तरह का उसने, मजमा लगाया

वह अनेक पात्र कि भूमिका, जीवंत कर रहा था
कभी वह शैतान तो कभी संत बन रहा था

आइये मेहरबान कदरदान, देखिये कैसे बिकता है ईमान
वह करता नमस्कार,हिंदू को राम राम, मुस्लिम को सलाम

आज मेरा ये जमूरा, आप सबको खूब हंसाएगा
बहुरूपिये का खेल दिखाकर, देश का हाल सुनाएगा

तब उस जमूरे ने, कुल्हा मटकाकर नाच दिखाया
बहुरूपिये का वेश धर, उछलकर सामने आया

मैं नेता बनकर, खूब भ्रष्टाचार करता हूँ
देश-प्रेम कि भावना का व्यापार करता हूँ

चारा भी खाता हूँ ताबूत भी चबाता हूँ
यूरिया और डामर तक पचा डालता हूँ

मैं अधिकारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता हूँ
हर कार्य में बढ़-चढ़कर चढ़ावा लेता हूँ

तब कही कोई परमिशन देता हूँ
उस पर भी अलग से कमीशन लेता हूँ

मैं पुलिस का ही संरक्षण करता हूँ
मासूम और बेगुनाहों का खूब भक्षण करता हूँ

यूँ भी रसूकदार लोगों का कुछ नहीं बिगाड़ पाता हूँ
इसलिए तो असहाय और कमजोरों का जुगाड़ लगाता हूँ

दो नम्बरी लोगों को तो बिलकुल भी नहीं छोड़ता हूँ
छोटी मछलियों से अपना पूरा हिस्सा पूरी तरह निचोड़ता हूँ

वैसे आज कल खूब कर रहा हूँ दबंगाई
क्या करूँ महाशय कितनी बढ़ गयी है महंगाई

मैं युवा के रूप में हर अर्थ बदल देता हूँ
अपने आकाओं के इशारे पर अनर्थ कर देता हूँ

दंगा-फसाद या हड़ताल में भी मैं ही काम आता हूँ
तोड़-फोड और मार-काट का सारा सामन लाता हूँ

छात्र के रूप में तो हंगामा ही मचा देता हूँ
शासन और प्रशासन के नाक में दम कर देता हूँ

छात्र-शक्ति, राष्ट्र-शक्ति हमसे टकराएगा कौन
आखिर हम जहाँ अड़ गये वहाँ आयेगा कौन ?

मैं उद्योगपति बनकर करोड़ों का चंदा देता हूँ
इसलिए हर मोर्चा पर कोई भी पंगा ले लेता हूँ

श्रमिकों का शोषण तो मेरा पहला उसूल है
पानी बिजली और टैक्स चोरी का आरोप एकदम फिजूल है

मैं डाक्टर अस्पताल को ही बीमार करता हूँ
किडनी हार्ट ब्लड का फुलटाइम जॉब करता हूँ

सरकारी दवा बिक्री का धंधा फिलहाल कमजोर है
मुफ्त इलाज कराने वाला ही सबसे बड़ा चोर है

इसलिए मुझे घर में ही प्रेक्टिस कि आदत है
दक्षिणा बिना मरीज देखना तो बिलकुल ही लानत है

साथ ही दवा दुकानों से भी मेरा परसेंट फिक्सशेसन होता है
तभी तो साधारण बीमारी में भी महँगी दवाई का सलेक्शन होता है

मैं ठेकेदार कि भूमिका भी खूब निभाता हूँ
सीमेंट न सही रेत से ही पुल बनाता हूँ

फिर भी जो कोई मेरा करता विरोध
अपने लठैतों से धुल चटाता हूँ

बाँध वगैरह के लिए भी करता यही तिकड़मबाजी
हरे-भरे नोटों के आगे कैन नहीं होगा राजी ?

जमूरे के इस खेल से लोग खूब हँस रहे थे
तो कुछ पीड़ित ऐसे भी थे जो अपनी बांह कास रहे थे

मैं आम आदमी दिन-रात खून-पसीना बहाता हूँ
तब कही जाकर दो वक्त कि रोटी जुटा पाता हूँ

यूँ तो मेरे नाम पर विकास योजनाओं का
यहाँ से वहाँ तक अंबार लगा दिया जाता है

मगर साहेबान जब जब आती है मेरी बारी
तो जाने क्यों मुझे ही भुला दिया जाता है

मेरे हिस्से का राशन कोई धन्ना सेठ खा जाता है
तो मेरा घासलेट कोई अधिकारी पी जाता है

मुझ गरीब का पेंशन तो सरपंच ही गटक जाता है
कभी चला जाऊं माँगने तो मुझ पर ही भड़क जाता है

अंत में जमूरा फिर कहता है बुरा ना मानना भाई साब
मैं तो ये सब कुछ पापी पेट के लिए करता हूँ माई-बाप

मगर प्रजातंत्र के रखवालों कि ऐसी भी क्या मज़बूरी है
सिर्फ अपना घर भरने के लिए ईमान बेचना क्या जरुरी है ?

®शशिकांत साहू
ग्राम-कुटेला(खेलभांठा)
सारंगढ़, रायगढ़(छग)

कभी-कभी

अजीब लगती है शाम कभी-कभी

जिंदगी लगती है बेजान कभी-कभी

समझ में आये तो हमें भी बताना ‘दोस्त’

क्यों करती है यादें परेशान कभी-कभी…

Untitled