तनहा बेबस रहा 
ना प्यार 
ना इज़हार रहा 
बस फर्क सिर्फ इतना सा रहा 
वो मिट्टी के ऊपर रोती रही
और मैं मिट्टी के अंदर खामोश सोता रहा…

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