हो चुकी अब किसी और कि वो…

कभी मेरी ज़िंदगी थी वो…

भूलता है कौन अपनी पहली मुहब्बत को…?

मेरी तो सारी खुशी थी वो…

फूलों कि तरह मुस्कुराती थी वो…

मेरे होंठों कि हँसी थी वो…

मुद्दतों के बाद देखा है मैंने उसको…

आज भी उतनी हसीन दिखती है वो…

जिसके नाम मैंने अपनी ज़िंदगी कर दी…

लोग कहते हैं मेरे लिए अजनबी थी वो…

नीलकमल वैष्णव”अनिश”

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