शुभ दोपहरी दोस्तों

तुम मेरे संग हो
या
कही और
यह जरूरी नहीं….

पर ऐ ‘अनिश’

जहाँ भी रहो,,,

तुम सिर्फ
और
सिर्फ
मेरी रहो….
नीलकमल वैष्णव”अनिश”

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