उसने कहा कि मुझे भूल जाओ…
मैंने तुम्हें ‘दिल’ से निकाल दिया है,
ऐ ‘अनिश’
बस
सुकून सा मिल गया यह सुनकर कि 
कभी तो हम उनके ‘दिल’ में थे…

किसी साहित्कार ने कहा है,,,

आजमाती है जिंदगी उसी को, 
जो कठिन रास्तों पर चलना जानता हो, 
जिंदगी में जीत उसी कि होती है, 
जो सब खो कर भी मुस्कुराना जानता हो…

और साहित्यकार है 
नीलकमल वैष्णव”अनिश”
०४/०६/२०१२

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