क्या मैं यूँ ही तेरी यादों कि किताब को सहेजने के लिए हूँ ?

जो तू कभी भी मुझे याद करके एक नया अध्याय खोल देती है…

images (8)®नीलकमल वैष्णव”अनिश”

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