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मीन, जंगल और जल का संरक्षण करना बेहद जरूरी…
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पर्यावरण के बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती, लेकिन औद्योगिकीकरण की अंधी दौड़ में अग्रसर लोगों को प्राकृतिक संरचना की जरा भी चिंता नहीं है। कृषि प्रधान जिले में मुट्ठी भर वन संपदा का संरक्षण नहीं हो पा रहा है और वहीं दूसरी ओर थोक में उद्योग लग रहे है। वर्तमान परिस्थति को देखते हुए ऐसा लगता है कि शासन-प्रशासन के साथ-साथ आम जन ने भी पर्यावरण को प्रकृत्ति से दूर करने की मानसिकता बना रखी है। जिले का भगौलिक क्षेत्रफल 4 लाख 46 हजार 674 वर्ग किलोमीटर है और यहां की आबादी 16 लाख से भी अधिक है। जबकि दूसरी ओर वन क्षेत्र बमुश्किल 5 प्रतिशत है। ऐसे में बढ़ती आबादी और औद्योगिकीकरण से पर्यावरण प्रदूषण के खतरे से पूरा जिला घिर गया है। जिले में लगने वाले पावर प्लांट तथा विद्युत वितरण के लिए लगने वाले टावर लाइनों के कारण हरियाली की बलि ली जा रही है। एक तो वैसे ही कम वन क्षेत्र के चलते पहले से जिले को गर्म क्षेत्र के रुप में जाना जाता है और ऊपर से पावर प्लांट की भेंट हजारों वृक्ष चढ़ चुके हैं, वहीं अभी हजारों वृक्षों की बलि लेनी बाकी है। हरियाली कटने से पर्यावरण असंतुलित होगा, जिससे जिले में बारिश पर विपरीत असर पड़ेगा, जिससे अभी से पानी की कमी से जूझ रहे जिले को पानी की बड़ी किल्लतों का सामना करना पड़ेगा। पीएचई विभाग के अधिकारी पिछले पांच वर्षों में भू-जल स्तर के 50 फीट तक नीचे चले जाने की बात स्वीकार कर रहे हैं। पर्यावरण संतुलन बनाने केन्द्रीय शासन ने उद्योगों के लिए ग्रीन बेल्ट विकसित करने कानून बनाया है। इस कानून के तहत संबंधित उद्योग को अनुपातिक तौर पर निर्धारित जमीन में ग्रीन बेल्ट विकसित करना है। जिले में 5-6 पावर प्लांट निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच चुके है। बन रहे पावर प्लांटों को अपने निर्माण कार्य के साथ ही ग्रीन बेल्ट का विकास करना था, लेकिन निर्माण कार्य के अंतिम चरण में पहुंच चुके प्लांटों के ईद-गिर्द कहीं ग्रीन बेल्ट नजर नहीं आ रहा है।
आंकड़ों को देखा जाए तो जिले की आबादी के हिसाब से यह ऊंट के मुंह में जीरा के सामान है, लेकिन लोगों को जागरुक करते हुए लोगों को पर्यावरण प्रदूषण करने से रोका जा सकता है। भू-जल स्तर बनाए रखने के लिए शासन की रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने की योजना नगर पालिका में सिर्फ शुल्क जमा कराने तक सिमट गई है। योजना लागू हुए आठ साल बीत चुके है। इस दौरान हजारों मकान बने पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाए गए। तेजी से गिरते भू-जल स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए नगरीय प्रशासन विभाग ने अगस्त 2006 में सभी नगरीय निकायों को आदेश दिए थे कि 140 वर्गमीटर से अधिक कवर्ड एरिया पर नए निर्माण कार्य की अनुमति देने के साथ रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की फीस भी जमा कराई जाए। भवन निर्माण के बाद वहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाए। एक व्यवस्था यह भी है यदि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भवन स्वामी स्वयं वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवा लें और इसका प्रमाण प्रस्तुत करें तो जमा कराई गई राशि वापस कर दी जाए। शासन का मानना था कि इससे लोग वाटर हार्वेस्टिंग लगाने के लिए प्रेरित होंगे और भू-जल स्तर बढ़ सकेगा, लेकिन इसके लिए लोग गंभीर दिखाई नहीं दे रहे है। इसका कारण नगर पालिका की उदासीनता को भी माना जा सकता है। नए मकान निर्माण की अनुमति देते समय नगर पालिका वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए शुल्क जमा करा लेता है, लेकिन बाद में मकानों में सिस्टम लगाया गया है या नहीं इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। एक ओर पानी की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे है। पानी बचाने के लिए नगर पालिका गंभीर नहीं है। हर साल गर्मी में भू-जल स्तर नीचे जाने से सैकड़ों नलकूप व हैंडपंप काम करना बंद कर देते हैं। जिले में वन विभाग, मनरेगा के तहत जिला पंचायत तथा क्रेडा द्वारा पौधरोपण के नाम पर हर साल लाखों की तादाद में पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन इन पौधों का कहीं कोई अता पता नहीं है। गत वर्ष तीनों विभागों के संयुक्त प्रयास से 16 लाख पौधे रोपे गए हैं। इसी तरह पिछले के वर्षों में भी लाखों की तादाद में पौधरोपण किया गया है। अगर पिछले 5 वर्षों में किए गए पौधरोपण के लिए लगने वाली जमीन की गणना की जाए तो वह जिले के क्षेत्रफल से भी ज्यादा होगी। ऐसे उद्देश्यहीन प्रयास ना केवल लोगों के बीच मजाक बनकर रह गया है, बल्कि शासन का करोड़ों नुकसान अलग है। पिछले 5 वर्षों में लगाए गए पौधों में से 5 प्रतिशत पौधों को जिंदा रखा जा सका होता तो आज जिले के चारों ओर हरियाली का राज होता।

सौजन्य साभार- इंटरनेट कि दुनियाँ श्री गूगल महाराज एवं संकलन नीलकमल वैष्णव अनिश

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अगर दुसरोँ का दुख देखकर

तुम्हेँ भी दुख होता है

तो
समझ लो

खुदा ने तुम्हेँ इंसान बनाकर कोई गलती नही कि…

नीलकमल वैष्णव”अनिश”

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BEST LINE

LOCKS ARE NEVER MANUFACTURED WITHOUT A KEY

SIMILARLY GOD NEVER GIVES PROBLEMS WITHOUT SOLUTIONS.

ONLY WE NEED TO HAVE PATIENCE TO UNLOCK THEM…

नीलू वैष्णव”अनिश”

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एक दिन जब वो हमसे मिले तो बोले

क्या हमे याद करते हो ?

अब उन्हेँ कौन बताएं याद करना इतना आसान होता तो

हम अपनी क्लास मेँ टॉप ना कर लेते…

नीलू वैष्णव”अनिश”

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कोई छुपाता है

कोई बताता है

कोई रुलाता है

तो कोई हंसाता है

दोस्ती तो हर कोई करता है किसी ना किसी से

फर्क इतना है के कोई आजमाता है 
और 
कोई निभाता है…

नीलकमल वैष्णव”अनिश”

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Painfull Words Only For Me..
जाते-जाते उसने पलट कर

मुझ से कुछ यूं कहा कि

तुम हमेँ भुला दो,

हम तो सिर्फ तुमसे प्यार सिखने आये थे

किसी और के लिए…

नीलू वैष्णव”अनिश”

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Don’t read Stories of Success
Read Stories of Failure.
Becoz Successfull Stories give only Massege
But Stories of Failure give new Ideas to Win…

नीलकमल वैष्णव”अनिश”

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सबके होते हुए भी तन्हाई मिलती है,
यादोँ मेँ भी गम कि परछाई मिलती है,
जितनी भी दुआ करेँ हम किसी को पाने की,
उस से ज्यादा उसकी जुदाई मिलती है.

नीलकमल वैष्णव”अनिश”