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अब मैं किसी पहचान का मोहताज नहीं ऐ ‘अनिश’

तेरी मुहब्बत में मैं बदनाम ही इस कदर हुआ हूँ…

®नीलकमल वैष्णव”अनिश”

डायरी…

क्या मैं यूँ ही तेरी यादों कि किताब को सहेजने के लिए हूँ ?

जो तू कभी भी मुझे याद करके एक नया अध्याय खोल देती है…

images (8)®नीलकमल वैष्णव”अनिश”

उनकी बेरुखी और मेरी बेकरारी कुछ यूँ है ?
जैसे दोनों में शर्त लगी है कौन जीतेगा…

®नीलकमल वैष्णव”अनिश”

उसको भूलना गवारा नहीं मुझे
पर वह रह रह कर याद आ रही है
और लोग तो कहते हैं ऐ ‘अनिश’
याद वो आते हैं जिन्हें भूल गये हो.

®नीलकमल वैष्णव”अनिश”

एक अहसास होने लगा है मुझे 

कि अब वो मुझे भूलने लगी है,

लगता है कि मेरी साँसे टूट रही है 

जीते जी ना भूलने का वादा जो था.
——————————
®नीलकमल वैष्णव”अनिश”

याद,,,

 

I MISS YOU(आई मिस यू)

सुबह से शाम तक,

दिन से रात तक,

कल से आज तक,

मंडे से संडे तक,

जनवरी से दिसंबर तक,

नींद से ख्वाब तक,

ज़मीन से आसमान तक,

इस किनारे से उस किनारे तक,

यहाँ से वहाँ तक,

आप से मुझ तक,

जिन्दगी से मौत तक,

चाँद से सितारे तक,

नार्थ से साऊथ तक,

इस्ट से वेस्ट तक,

दिल से दिल तक,

कली से गुलाब तक,

और
जिन्दगी के पहले दिन से

जिन्दगी के आखिरी दिन तक…

आई मिस यू(आप हमेशा याद आओगे)

मैं इक कच्ची कली हूँ 

आपके छूने से खिल जाउंगी 

मदहोशी कुछ इस कदर है मुझमें 

घूर के ना देखना कभी 

जो देखोगे तो गिर जाऊँगी 

शरारतें हैं कुछ ज्यादा मुझमें 

तड़प-तड़प के तुम्हें तड़पाउंगी 

संभालना उस दिन जानू मुझे 

जब मैं खुद इक कली 

तुझ भंवरे से लिपट जाऊँगी 

मैं इक कच्ची कली हूँ 

आपके छूने से खिल जाउंगी 
———————–(Moon)

नीलकमल वैष्णव”अनिश”